जीवन सहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक सेवा, इन तीनों का अद्‌भुत संगम थे पं• कमलापति त्रिपाठी वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister of Uttar Pradesh) भारत के रेल मंत्री  (Railway Minister of India), स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, साहित्यकार और इण्डियन नेशनल कांग्रेस के वरिष्ठ लीडर रहे थे। 

कमलापति त्रिपाठी का जीवन परिचय

त्रिपाठी जी का जन्म 15 सितम्बर 1905 को भदोही जिले में, जो अब ज्ञानपुर जिले के नाम से जाना जाता है, में हुआ था। उनके पिता का नाम नाथूलाल त्रिपाठी था। जो कि संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे। 

कमलापति त्रिपाठी की शिक्षा

त्रिपाठी जी शिक्षा-दीक्षा वाराणसी और प्रयाग जैसे ज्ञान केन्द्रों पर हुई थी। उन्होंने इतिहास, संस्कृत, साहित्य और राजनैतिक विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षा प्राप्त की थी। बाल्यकाल से ही देशप्रेम और लेखन में उनकी रुचि हो गयी थी।

स्वतंत्रता संग्राम

स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ने के बाद वे Non- Cooperation Movement, Civil Disobedience Movement, और Quit india Movement - 1942 में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। इसके कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा वे महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरु से प्रभावित थे।

पत्रकार और साहित्यक

त्रिपाठी जी हिन्दी समाचार पत्र 'आज' के प्रमुख स्तंभकार रहे थे। वे राष्ट्रवादी विचारों को अपनी कलम से कागज पर उकेरते थे।" धरती के लाल, ज्योतिकलश, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर विचार, नेहरू और गाँधी चिन्तन जैसी महत्वपूर्ण पुस्तको को उन्होंने लिखा था।

राजनीति

त्रिपाठी जी ने स्वतंत्र भारत में राजनीति में कदम रखा था। वे कई बार विधान परिषद सदस्य और राज्य सरकार में मंत्री बने। उनकी स्वच्छ छवि, ईमानदारी और जनता के प्रति जबाब देही उन्हें एक उत्कृष्ट लीडर बनाती है।

मुख्यमंत्री

4 अप्रैल 1971 को वे उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री बने। भले ही उनका कार्यकाल अल्प अविधि का रहा हो किन्तु उन्होंने जनहित में अनेकों कार्य किये।

उपलब्धियाँ

* शिक्षा सुधार के अन्तर्गत उन्होंने हिन्दी माध्यम से अध्ययन का विकास, स्कूली शिक्षा योजनाएं - विश्वविद्यालयों को नई दिशा का मार्ग प्रशस्त किया।

* संस्कृति विरासत संरक्षण के अंतर्गत उन्होंने मंदिरो और सांस्कृतिक स्थलों का विकास और वाराणसी के संस्कृतिक विकास पर जोर दिया। 

* सड़क एवं आधारभूत संरचना के अन्तर्गत उन्होंने ग्रामीण सड़को स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और बिजली सुधार पर बल दिया।

* कानून व्यवस्था के अन्तर्गत उन्होंने अपराधनियं ऋण पर बल दिया।

रेलमंत्री

त्रिपाठी जी 1980 से 1982 तक रेलमंत्री

रहे। उनकी उपलब्धिया निम्नवत थी|

* कोकण रेलवे प्रोजेक्ट की अवधारणा

* रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण

* रेलवे कर्मचारियों को वेलफेयर पॉलिसी

* नये रूट और नई ट्रेनों की शुरुआत

व्यक्तित्व

कमलापति त्रिपाठी व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। सादगी, विनम्रता, बौद्धिकता, आध्यात्मिक दृष्टिकोण जनता के प्रति समर्पण उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी।

निधन

त्रिपाठी जी का निधन 08 दिसम्बर 1990 को हुआ था। देश ने एक पत्रकार, राजनीतिज्ञ, साहित्यिक खोया था। इसके लिये देश उन्हें आज भी याद करता है। उनके सम्मान में वाराणसी, में कमलापति त्रिपाठी स्मारक भवन बनाया गया है।

निष्कर्ष

त्रिपाठी जी ऐसे लीडर थे जिन्हें नैतिकता, ईमानदारी और कर्मठता, समाज सेवा के लिये याद किया जाता है। वे भारत की संस्कृति और राजनैतिक विरासत के संरक्षक थे|